Sad Shayari in Hindi | Shayari for Sad, दो लाइन सैड शायरी

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Sad Shayari क्या खोजते है?

बहुत सरे लोग सैड शायरी इसलिए ढूंढते है क्योंकि उन्हें धोखा मिला होता है और वे सैड शायरी के माद्यम से अपना दुःख को ब्यत करते है| हम सभी लोग जिसको सच्चा प्यार कहते है, वो सच्चा प्यार नहीं होता है असल में वह झूटा प्यार होता हैं| इसीलिए लोग दिल टूट जाने पर सैड शायरी को ढूंढते है|

आँखें थक गई है आसमान को देखते देखते,
पर वो तारा नहीं टूटता,जिसे देखकर तुम्हें मांग लूँ...!!



तुम्हें पा लेते तो किस्सा इसी जन्म में खत्म हो जाता,
तुम्हे खोया है तो यकीनन कहानी लम्बी चलेगी...!!



ऐ दिल तू क्यों रोता है,
ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है...!!



सोचा ही नहीं की, जिंदगी में कभी ऐसे भी फ़साने होंगे,
रोना भी जरुरी होगा, और आंसू भी छुपाने होंगे...!!



चलो मान लिया, मुझे मोहब्बत करनी नहीं आती,
लेकिन जरा ये तो बताओ, तुम्हे दिल तोडना किसने सिखाया...!!



कभी मौका मिले तो, हम किस्मत से जरूर शिकायत करेंगे,
क्यों छोड़ जाते है वो लोग, जिन्हे हम टूट कर चाहते है...!!



होठों की हँसी को न समझ हक़ीकत ऐ जिंदगी,
दिल में उतर के देख कितने टूटे हुए है हम...!!



टूटा हुआ दिल भी धड़कता है,
कभी किसी की याद में तो कभी किसी की फरियाद में...!!



टूटा हुआ दिल भी धड़कता है,
कभी किसी की याद में तो कभी किसी की फरियाद में...!!



यहाँ कोई टुटा हुआ है कोई रूठा हुआ है,
यहा इश्क़ न जाने कितनो को लूटा हुआ है...!!



किसी के दिल में साथ रहने का इरादा ही झूठा है,
मैं तुमसे और तू मुझसे आज तक रूठा है...!!



दिल टुटा है तो अपनी गलती से,
उसने कब कहा था की मुझसे प्यार करो...!!



हम दोनों ही धोखा खा गए, मैंने तुम्हे औरों से अलग समझा और,
तुमने मुझे औरों जैसा समझा...!!



प्यार उससे करो जिसका दिल पहले से टुटा हुआ हो,
क्यूंकि जिसका दिल टुटा होता है वो किसी का दिल नहीं तोड़ते...!!



चलो बिखरने देते है ज़िन्दगी को अब,
सँभालने की भी तो एक हद होती है।...!!



बैठे हैं तन्हा, इस खाली कमरे में,
दिल में छुपी, हैं बेबसी रातें।...!!



‌तुझसे जुदा होकर भी दिल को बेचैनी है,
तेरी यादों का आलम यही है मेरी ज़िंदगी...!!



उनकी खामोशियां बोल देती है जिनकी बात नहीं होती,
प्यार वो भी करते हैं जिनकी कभी मुलाकाते नहीं होती...!!



कुछ पता नही ये दिल सुधर गया,
या किसी की मोहब्बत में बिगड़ गया...!!



वो हमारे होकर अब किसी और के हो गए,
वो जिसके प्यार में हम खुद को भूल गए...!!



क्यों तुम्हारे बिन कहीं दिल नहीं लगता,
क्यों तुम्हारे बिना रहना मुश्किल है बहुत...!!



वो हमारे होकर अब किसी और के हो गए,
वो जिसके प्यार में हम खुद को भूल गए...!!



वो शक्स मुझे बीच सफर में छोड़ गया,
जिसके लिए मैंने मेरे अपने छोड़ दिए...!!



बड़ा नाजुक रहा मोहब्बत का धागा,
टूटा तो फिर जुड़ना मुश्किल हो गया...!!



मुझे नहीं मतलब दुनिया के रंगों से,
मुझे मेरी तनहाइयां मेरी खामोशियां पसंद है...!!



बदल गए तो अब हम कुछ इतना बदल गए,
अब हमें खुद से भी ज्यादा प्यार नहीं...!!



मुझे मतलबी रिश्तो की आदत ही नहीं,
मैं अपनी तनहाइयों में भी खुश रहता हूं...!!



तू नहीं तो तेरी बेवफाई के किस्से हैं,
मैं अकेला हो कर भी अकेला नहीं रहता...!!



अभी दर्द है फिर राहत हो जाएगी
तेरे बिना जीने की आदत हो जाएगी...!!



तेरे जाने के बाद आलम है ये,
मुझे मेरे दिल की धड़कन भी सुनाई देती है...!!



ये जो बैठें है राह में फरमाते हैं कुछ,
इन्हें कहो मेरी ज़िन्दगी का पता बता दे मुझे...!!



उसका क्या जो मुझपे गुज़री,
तुम अपने हालात बताकर रुक्सत हो गए...!!



धड़कता हुआ पत्थर है सीने में मेरे,
जिससे तुम अपना दिल लगा बैठे हो...!!



आगे निकल गए सारे ख्वाब मेरे,
मैं वक्त की मार सह कर पीछे रह गया...!!



एक दोस्त से मैंने ये हुनर सीखा है,
इस जमाने में धोखा देना मुश्किल नहीं होता...!!



कोई इरादा नहीं फिर दिल लगाने का,
एक मोहब्बत से ही मेरा दिल भर गया...!!



कि मोहब्बत तुमसे उसका असर है ये,
हर परेशान शख्स मुझे अपना सा लगता है...!!



इश्क़ हैं तो रूह से महसूस करो,
जिस्म की खुश्बू तो कुत्ते भी सूंघ लेते हैं...!!



हर धोखा देने वाला धोखेबाज नहीं होता,
कुछ किस्मत का भी लिखा होता है...!!



जिन्दगी की हर मोड़ पर धोखेबाज मिलें,
उनमें पराये कम अपने ज्यादा मिलें...!!



जहां महफ़िल सजी हो वह मेला होता है,
जिसका दिल टूटा हो वो तन्हा अकेला होता है...!!



जब तोड़ना ही था तो रिश्ता जोड़ा क्यों,
खुशी नहीं दे सकते थे तो हमारा गम से नाता जोड़ा क्यों...!!



तन्हा रातें कुछ इस तरह से डराने लगी मुझे,
मैं आज अपने पैरों की आहट से डर गया...!!



मैं अकेले रहकर अपने बारे में बहुत कुछ सीख रहा हूँ,
और जो मैं कर रहा हूँ वह कर रहा हूँ...!



कुछ कर गुजरने की चाह में कहाँ कहाँ से गुजरे,
अकेले ही नजर आये हम जहाँ जहाँ से गुजरे...!!



दुनिया की भीड़ में इतने तन्हा हो गए हैं हम,
अब तो कमबख्त परछाइयाँ भी साथ नहीं देती...!!



कितना भी दुनिया के लिए हँस के जी लें हम,
रुला देती है फिर भी किसी की कमी कभी कभी...!!



एक तुम्हीं थे जिसके दम पे चलती थी साँसें मेरी,
लौट आओ कि ज़िंदगी से वफ़ा निभाई नहीं जाती...!!



अपने दर्द को छुपा कर रखिए जनाब,
यह शहर रोने वालो को रुलाता बहुत है...!



जिन से खत्म हो जाती हैं उम्मीदें,
उनसे फिर शिकायत नही रहती...!!



अधूरा ही रहा मेरा हर सफर कभी,
रास्ते रखो गए तो कभी हमसफर...!!



तेरा बार बार रूठना मुझे अच्छा लगता है,
पर क्या तुझे भी मेरा मनाना अच्छा लगता है...!!



कितना अकेला हो जाता है वो शख्स,
जिसे जानते तो बहुत लोग है मगर समझते कोई नही...!!



एक तेरा ख्याल ही तो है मेरे पास वरना,
कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है...!!



तुम मेरे साथ हो ये सच तो नहीं है लेकिन,
मैं अगर झूठ न बोलूँ तो अकेला हो जाऊँ...!!



पहले ख़ुशी फिर जिद फिर आदत बन जाती है,
किसी अपने से जुदा होने अकेले रहना मजबूरी बन जाती है...!!



अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे,
क्यूँ तन्हा से हो गए हैं तेरे जाने के बाद...!!



आपने तो इस तरह तन्हा कर दिया मुझे,
अब तो लोगों की भीड़ में भी खुद को तन्हा पाते है...!!



मेरा हाल देखकर मोहब्बत भी शर्मिंदा है कि,
ये शख्स सब कुछ हार गया फिर भी जिन्दा है...!!



अब नाराज नहीं होना है किसी से,
बस नजर अंदाज करके जीना है...!!



वक्त के बदल जाने से इतनी तकलीफ नही होती है,
जितनी किसी अपने के बदल जाने से तकलीफ होती है...!!



कितना भी दुनिया के लिए हँस के जी लें हम,
रुला देती है फिर भी किसी की कमी कभी कभी...!!



जो लोग तन्हाई का आलम जानते है,
वे लोग दूसरों के लिए हमेशा तैयार रहते है...!!



कहने लगी है अब तो मेरी तन्हाई भी मुझसे,
मुझसे कर लो मोहब्बत मैं तो बेवफा भी नही...!!



हम तो आज भी अकेले नहीं रहते,
हमारे अकेलेपन ने हमें अपना बना लिया...!!



कितना भी दुनिया के लिए हँस के जी लें हम,
रुला देती है फिर भी किसी की कमी कभी कभी...!!



सोचते थे की नजर अंदाज़ करेंगे उसे उसी की तरह,
पर नहीं कर सके वो जुल्म जिसका दर्द सिर्फ हम जानते है...!!



आज इतना अकेला महसूस किया खुद को,
जैसे लोग दफना कर चले गए हो...!!


अकेला छोड़ दो मुझे या फिर मेरे हो जाओ,
मुझे अच्छा नहीं लगता कभी पाना कभी खोना...!!



अकेले बैठने का एक अलग एहसास होता है,
एक अपना साया ही जीवन भर साथ होता है...!!



एक आँसू भी गिरता है तो लोग हजार सवाल पूछते है,
ऐ बचपन लौट आ मुझे खुल कर रोना है...!!



ये दुनिया कहने को तो अपनो का मेला है
ध्यान से देखो तो यहां हर शख्स अकेला है...!!



लौटते वो है जो रुठकर चले जाते है,
टूटकर जाने वाले लौटा नहीं करते...!!



मैं छोड़ ना सका अंधेरे को अकेला,
पैग़ाम तो बहुत आये थे सूरज के घर से...!!



अकेले ही तय करने होते हैं कुछ सफर,
जिंदगी के हर सफर में हमसफ़र नहीं होते...!!



वो मन बना चुके थे हमे छोड़ जाने का,
किस्मत तो सिर्फ उनके लिए एक बहाना था...!!



आज कुछ अजनबी सा अपना वजूद लगता है,
साथ हैं सब मगर दिल क्यों अकेला सा लगता है...!!



मैं ढूंढता हूं खुद में खुद ही को,
शायद मैं वो नही जो हुआ करता था...!!



तेरे पास मेरी यादों का मेला रहेगा,
भीड़ में रहकर भी तू अकेला रहेगा...!!



बदला नहीं है मेरा दिल यकीन नहीं तो आ के देख ले,
बस इसे दुनिया समझने की समझ आ गई है...!!



ना समझ ही रहते तो अच्छा था,
उलझने बढ़ गयी है जब से समजदार हुए है...!!



कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,
हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है...!!